Surat: पी.पी. सवाणी स्कूल में बाल सुरक्षा व पॉक्सो एक्ट जागरूकता सेमिनार

Surat: पी.पी. सवाणी स्कूल में बाल सुरक्षा व पॉक्सो एक्ट जागरूकता सेमिनार
Shubham Pandey JHBNEWS टीम,सूरत 2026-08-25 16:46:05

सूरत: बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा तथा उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पी.पी. सवाणी रेडिएंट इंग्लिश एकेडमी में प्रिंसिपल डॉ. रितेश अग्रवाल के नेतृत्व में सूरत पुलिस के सहयोग से एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में 1200 से अधिक विद्यार्थियों और 73 से अधिक स्टाफ सदस्यों को बाल सुरक्षा, पॉक्सो (POCSO) एक्ट तथा उपलब्ध सरकारी सहायता सेवाओं के बारे में जानकारी दी गई।

इस कार्यक्रम में सूरत पुलिस के महिला सेल, क्राइम ब्रांच तथा बाल सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों और विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को पॉक्सो एक्ट (POCSO Act), बाल सुरक्षा (Child Safety), गुड टच-बैड टच (Good Touch–Bad Touch), अज्ञात या अनुचित व्यक्तियों से सावधानी, अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम तथा संकट के समय सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया के बारे में सरल भाषा में समझाया। बच्चों को किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार या शोषण का सामना करने पर चुप न रहने और किसी विश्वसनीय व्यक्ति व उचित सरकारी तंत्र से संपर्क करने का मार्गदर्शन दिया गया।


इस अवसर पर एसीपी मिनी जोसेफ (महिला सेल, क्राइम ब्रांच सूरत शहर), पुलिस इस्पेक्टर एन.एल. देसाई (इन्वेस्टिगेशन यूनिट फॉर क्राइम अगेंस्ट वुमेन, क्राइम ब्रांच), एएसआई वैशाली देवरे, एएसआई निकिता किरीट (सिंगणपोर पुलिस स्टेशन), महेश वी. परमार (जेंडर स्पेशलिस्ट, DHEW महिला एवं बाल अधिकारी कार्यालय सूरत), मनीषा आहिर (काउंसलर), एएसआई भावना चौधरी (महिला अभयम 181) तथा कांता जोगडिया (DLSA PLV और पॉक्सो सपोर्ट पर्सन, बाल सुरक्षा इकाई - DCPU) उपस्थित रहे।


इस विद्यालय में विद्यार्थियों को पुलिस की हेल्पलाइन, बाल सुरक्षा सेवाओं और शिकायत दर्ज कराने के बाद की न्याय प्रक्रिया के बारे में भी अवगत कराया गया। वहीं, शिक्षकों और स्टाफ को अभयम 181, विधवा सहायता योजना, प्री-मैरिज काउंसलिंग सहित उपयोगी सरकारी सेवाओं और योजनाओं के बारे में मार्गदर्शन दिया गया ।

पी.पी. सवाणी रेडिएंट इंग्लिश एकेडमी ने इस कार्यक्रम के माध्यम से एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि बच्चों और महिलाओं की संपूर्ण सुरक्षा केवल किसी एक संस्था या एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। पुलिस प्रशासन और शिक्षण संस्थान मिलकर लगातार जागरूकता और सुरक्षा का कार्य करें, तभी देश के बच्चों और महिलाओं को अधिक सुरक्षित वातावरण दिया जा सकता है।