मोदी सरकार की जल रणनीति: चिनाब के अतिरिक्त पानी का होगा भारत में इस्तेमाल; पाकिस्तान चिंतित

मोदी सरकार की जल रणनीति: चिनाब के अतिरिक्त पानी का होगा भारत में इस्तेमाल; पाकिस्तान चिंतित
Shubham Pandey JHBNEWS टीम,सूरत 2026-06-01 12:11:37

केंद्र सरकार ने चिनाब नदी के अतिरिक्त पानी को ब्यास बेसिन की ओर मोड़ने के लिए 31 जुलाई 2029 की समय सीमा तय की है। लगभग 2352 करोड़ रुपये की लागत वाली यह महत्वाकांक्षी चिनाब-ब्यास लिंक टनल परियोजना हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में स्थित है। 8.7 किलोमीटर लंबी इस सुरंग के माध्यम से चिनाब नदी के अतिरिक्त पानी को ब्यास बेसिन प्रणाली की ओर मोड़ा जाएगा, जिससे पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी के प्रवाह में कमी आएगी। गौरतलब है कि चिनाब एक पश्चिमी नदी है, जिस पर सिंधु जल संधि के तहत भारत के सीमित अधिकार थे। लेकिन पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से भारत ने इस संधि का पालन करना बंद कर दिया है।

लाहौल-स्पीति में बनेगी विशाल जल परिवहन सुरंग

एक रिपोर्ट के अनुसार, लिंक-3 परियोजना हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले की लाहौल घाटी में चिनाब नदी पर प्रस्तावित है। वर्तमान योजना के तहत चिनाब नदी पर 19 मीटर ऊंचा बैराज, इंटेक संरचना और लगभग 8.7 किलोमीटर लंबी जल परिवहन सुरंग का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा परियोजना के दूसरे चरण में जलविद्युत उत्पादन की भी संभावना है।

सरकार के इस फैसले का उद्देश्य क्या है?

जल मोड़ने का स्थान कोसकर गांव के पास और अटल टनल रोहतांग के उत्तरी प्रवेश द्वार से ऊपर की ओर स्थित है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह योजना केवल जलविद्युत उत्पादन या इंजीनियरिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि पश्चिमी नदियों के जल का अधिक प्रभावी उपयोग करना भी इसका प्रमुख उद्देश्य है।

पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका

सिंधु जल संधि समाप्त होने के बाद पाकिस्तान की ओर बहने वाले पानी का उपयोग अपने हित में करने की दिशा में भारत का यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद भारत अधिक पानी का उपयोग कर सकेगा, जबकि पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी के प्रवाह में कमी आएगी।

भारत सरकार के इस फैसले से लगभग 4000 मेगावाट अतिरिक्त जलविद्युत ऊर्जा का उत्पादन संभव होगा। साथ ही पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे उत्तर भारतीय राज्यों में सिंचाई और पेयजल सुविधाओं में भी वृद्धि होगी।

सिंधु जल संधि के बाद भारत को हो रहा फायदा

1960 की सिंधु जल संधि के तहत चिनाब नदी का अधिकांश पानी पाकिस्तान के हिस्से में दिया गया था, जिसका उपयोग वह अपनी विशाल नहर प्रणाली के माध्यम से सिंचाई के लिए करता था।

लेकिन पहलगाम हमले के बाद संधि प्रभावहीन होने से अब भारत अपनी सीमा के भीतर चिनाब के पानी का अधिकतम उपयोग कर रहा है। भारत अतिरिक्त पानी को सुरंगों के माध्यम से अपने क्षेत्र में मोड़ने के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रहा है।

इस परियोजना के लागू होने से भारत की जल सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत होगी, जबकि पाकिस्तान के लिए पानी की उपलब्धता में कमी आने की संभावना जताई जा रही है।